जोगियों का स्नान


ईश्वर ने जितने भी इंसान बनाए हैं सब अपने अपने हिसाब से अपना जीवन व्यतीत करते हैं। इन्ही में से भारत वर्ष में योगी/जोगी परम्परा भी है। उनकी अपनी एक अलग ही जीवन शैली है। वह आमजन से दूर अलग स्थान पर रहते हैं। इन को योगी, जोगी, नागा, साधू, हठी, जपी, तपी आदि नामों से भी जाने जाता हैं। इनमे से ज्यादतर अपने स्थान अर्थात आमजन से अलग रहकर के ही अपना जीवन यापन करते जान पड़ते हैं।  इनकी जीवन शैली बहुत ही कठिन होती है। इनका एक ही उद्देश्य होता है, ईश्वर की प्राप्ति। यह सब उस पारब्रह्म की उपासना में लीन रहते हैं। इनके बारे में आमजन को कोई ज्यादा जानकारी नहीं होती है। आमजन से उनका सामना मात्र धार्मिक उत्सवों पर ही संभव हो पाता है। हम इन योगियों/जोगियों को देखकर यह महसूस नहीं कर पाते की यह भी स्नान करते हैं। परन्तु एक सच्चा योगी जो स्नान करता है वह मनुष्य नहीं कर सकता है।


प्रायः एक योगी पांच प्रकार के स्नान करता है। सर्वपर्थम वह राख, स्वाह, विभूत या अन्य किसी भी नाम से पुकारें वह उसे अपने शरीर पर लगाकर उससे स्नान करता है। आप सबको पता होगा कि कुछ समय पूर्व तक हम भारतीयों के घरों में जूठे बर्तनों को राख से ही साफ़, पवित्र किया जाता था। जोगी द्वारा प्रयुक्त राख, स्वाह या विभूत गाय के गोबर से बनी होती है। ऐसा माना गया है कि गाय के गोबर में रासायनिक तत्व मौजूद होते हैं जिससे शरीर की बीमारियां दूर होती हैं। इस विभूत स्नान के साथ साथ उसके शरीर के अन्दर से गंदगी बाहर आ जाती है। तब वह प्रकृति की गोद में बहती स्वछ हवा में अपने शरीर को स्नान करवाता है। इसके बाद वह तीसरा स्नान सूर्य की गर्मी से करता है जब सूर्य की गर्मी से पसीने के साथ अन्दर के कण बाहर निकल जाते हैं तत्पश्चात वह चौथे स्नान के लिए खुले में स्थित नदी, सरोवर आदि में शरीर को शीतल जल से साफ़ करके आनंदित हो जाता है और अंत में नाम रुपी धुन अर्थात सिमरन, जप,तप, से स्नान करके वह अपने शरीर को भीतर से स्वछ करता है तो वह पूर्ण रूप से निर्मल हो जाता है। यह स्नान आमजन के लिए प्रायः असम्भव ही दिखाई जान पड़ता है। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि योगी ही वास्तव में अपने शरीर को मात्र बाहरी स्नान के द्वारा ही साफ़ नहीं रखते अपितु जप तप रुपी स्नान से अपने अन्दर को भी साफ़ सुथरा रखते हैं। ऐसा स्नान आम मनुष्य द्वारा सम्भव नहीं प्रतीत होता है। इसलिए ही इसे योगियों का स्नान कहा गया है।