पारब्रहम ईश्वर ने इस संसार में अनेको प्रकार के जीवो को जन्म दिया है इन जीवो में सर्वोत्तम मनुष्य को माना गया है। क्योकि सब जीवो के पास सब कुछ है परन्तु मनुष्य के पास प्रभु नाम का सिमरन करने का मौका है यह अवसर मनुष्य जीवन के आलावा अन्य किसी भी जीव को प्राप्त नहीं है। कहा गया है बड़े बड़े देवी देवता भी मनुष्य के रूप में जन्म लेना चाहते हैं क्योंकि यह देवता भी मनुष्य को पूजा, उस्तत्ति करने पर आशीर्वाद रुप में इच्छित वरदान के रूप में जो फल प्रदान करते हैं, उनके पास भी यह सीमित मात्रा में ही होता है। अर्थात जैसे हम पानी की टंकी में पानी का संग्रह करते हैं और जब आवश्कयता होती है तो उस संचित पानी को खर्च करते हैं। यदि हम इस संचित पानी को पुनः संचित नहीं करेंगे और खर्च ही खर्च करते रहेंगे तो एक समय आएगा कि हमारा संचित पानी समाप्त हो जाएगा। इसी प्रकार बड़े बड़े देवी देवता भी अपने को मनुष्य जन्म में पाकर अपने संचित भंडार के संचय को बढ़ाते हैं।
इससे पता चलता है कि मनुष्य रूप कितना महत्वपूर्ण है। हम लोग इस बात को याद नहीं रखते हुए नश्वर संसार में उन वस्तुओं को इक्क्ठा करने में जुटे रहते हैं। जिन वस्तुओं को हमारे साथ नहीं जाना है। यह बात अक्सर सब लोग जानते हैं। परन्तु फिर भी मोह माया के मक्क्ड़जाल में फंसे रहते हैं और अनमोल मनुष्य जीवन व्यर्थ चला जाता है। मनुष्य जन्म पाते समय परमात्मा को उसके नाम सिमरन का भरोसा देकर आता है परन्तु सांसारिक मोह माया के जंजाल में फंसकर उस एक सर्वोच्च शक्ति को ही भूल जाता है जिसके पास अंत में पहुंचना है। जिसको हिसाब देना है।
इसलिए मनुष्य को अपने इस जीवन का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग उस की उस्तत्ति में लगाना चाहिए। अपने आवश्यक कर्म करते समय भी उसकी उपस्थित्ति का बोध रखना चाहिए। अनावश्यक रूप से, मूर्खता पूर्ण चालाकियों से धन सम्पदा का संग्रह नहीं करना चाहिए। सदैव यह याद रखना चाहिए कि वह सर्वोच्च शक्तिमान हर समय हमे देख रहा है।