निंदो निंदो मोको लोक निंदो,
निंदा मन को बड़ी प्यारी।
भारतवर्ष में सदियों से हर वर्ग में सम्मानित संत कबीर दास जी की उक्त पंक्ति अपने आप में ही साफ़ साफ़ संदेश देती है कि जो कोई भी कबीर दास जी की निंदा करता है वह उन को बड़ा प्यारा लगता है। उन्होंने कहा है कि " निंदक नेड़े राखिये " यानि अपनी निंदा करने वाले को अपने नजदीक ही रखना चाहिए। इसके बहुत फायदे होते हैं। मगर विचारणीय प्रश्न यह है कि क्या आज ऐसा हो रहा है।
आज जहाँ कहीं भी देखेंगे हर कामयाब इंसान के इर्द गिर्द चापलूसों की चौकड़ी ही नजर आएगी। चाहे कोई राजनैतिक नेता हो या कोई ऊँचे पद/ओहदे पर विराजमान अन्य कोई व्यक्ति हो। चापलूस उस तक ना सिर्फ अपनी पहुँच बना ही लेते हैं बल्कि उसके प्रति निष्ठवान लोगो को भी बेदखल करने में कामयाबी हो जाते हैं और उसके इर्द गिर्द अपनी चौकड़ी बना लेते हैं।
इसलिए कबीरदास जी कहते हैं निंदक को अपने नजदीक ही रखिए। जो व्यक्ति आपके काम की निंदा करता है वह आपका असली मित्र है क्योंकि अपनी आलोचना होने से आपको अपनी कमियों का पता चल जाता है। जिससे आप चौकन्ने हो जाते हैं। अपनी गलतियों में सुधार लाते हैं। इस प्रकार से आप अपनी गलतियों को सुधार कर के वास्तविक रूप में एक कामयाब इंसान बन सकते हैं।
इसके लिए आपके पास धैर्य होना चाहिए क्योंकि आज के समय में अपनी निंदा सहना भी कोई आसान काम नहीं है। परन्तु जो कोई भी अपनी निंदा को बर्दाश्त कर जाता है तो फिर उस को कामयाबी की सीढ़ियों चढ़ने से कोई नहीं रोक सकता है।