क्या यह आप की जीत है ?

अभी हॉल में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में चार राज्यों में बीजेपी ने विजय हासिल की है तो पांचवे राज्य पंजाब में अरविन्द केजरीवाल की आप पार्टी ने विजय पाई है। 

इस पर विचार किया जाए और देखा जाए की इस जीत का मुख्य कारण क्या है ? क्या पंजाब की जनता ने केजरीवाल के नाम पर या उसकी पार्टी के नाम पर या भगवंत मान के नाम पर आप पार्टी  को सत्ता की चाबी सौंपी है। 

हमारा यह सोचना है कि जब कोई व्यक्ति जंगल में अकेला होता है और रास्ता भटक जाता है और उसे जंगल से बाहर निकलने की कोई राह नहीं सूझती है तो वह किसी ना किसी दिशा की और चल पड़ता है।  अब आगे चलकर वह जंगल से बाहर निकलेगा या वह और घने जंगल में फंस जाएगा उसे इस बात का अंदाजा नहीं होता है मगर फिर भी वह चलता रहता है। 

ऐसे ही कुछ हालात पंजाब में मतदान करने वाले मतदाताओं के भी लगते हैं।  पंजाब में पुराने स्थापित राजनैतिक दल जैसे अकाली दल, बीजेपी का अलग अलग हो जाना, कांग्रेस में व्यक्तिगत गुटबाजी के साथ साथ उनके आलाकमान के अजीबोगरीब दिखाई पड़ते निर्णय एवं आपसी विश्वास की भारी कमी, पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह का अपनी बढ़ती उम्र के बावजूद आमजन की समझ से परे बड़े बड़े दावे आदि करने के कारण पंजाब की जनता के पास कोई ठोस विकल्प ही नहीं बचा होने के कारण, आप पार्टी के पक्ष में वहाँ इकतरफा मतदान हुआ जान पड़ता है। यदि ऐसा नहीं होता तो उत्तराखण्ड में इसी आप पार्टी के प्रत्याशियों के साथ साथ पार्टी के घोषित मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की जमानत तक जब्त नहीं हो जाती। 

इन्ही कारणों से हमारा यह मत बनता है कि यह आप पार्टी की जीत कम पंजाब में पुराने स्थापित राजनैतिक दलों जैसे अकाली दल, बीजेपी, कांग्रेस पार्टियों की हार ज्यादा दिखाई पड़ती है। 

हमारी और से आप पार्टी को इस विजय पर शुभकामनाएं और उम्मीद करते हैं कि वह पंजाब की जनता से किये वायदे अवश्य पूरे करेंगे।