नई मुद्रा
जैसा की सभी को विदित है भारत, चीन, ब्राज़ील, रूस और दक्षिण अफ्रीका पांच देशों ने मिलकर एक संगठन बनाया हुआ है। जिसका नाम है ब्रिक्स। जब यह सब देश मिले थे तब दुनिया के हालात अलग थे। आज दशको बाद दुनिया काफी बदल गई है। हलात भी बदल गए हैं।
आज चीन दुनिया की सर्वोच्च शक्ति बनने को उतावला है। तो रूस यूक्रेन से उलझा हुआ है। चीन इस बात का भी फायदा उठाना चाहता है। यद्धपि करोना काल के कारण उसकी छवि को काफी नुकसान पंहुचा है। परन्तु उसकी सप्लाई चैन के कारण दुनिया उससे चाह करके भी पूरी तरह से मुँह नहीं मोड़ पा रही है। यही कारण है कि वह अपनी दादागिरी दिखाने से बाज नही आ रहा है। लेकिन अब ज्यादा समय नहीं लगेगा, उसकी होश्यारी ज्यादा दिन नहीं चल पायेगी।
अगस्त महीने में ब्रिक्स देशों की मीटिंग दक्षिण अफ्रीका में होगी। वहां पर ब्रिक्स देशो द्वारा एक नई मुद्रा चलन में लाने की बात हो सकती है। चीन इस में अपने युआन को लाना चाहेगा। परन्तु दुनिया के वर्तमान हालात में भारत के लिए इसे अपनाना मुश्किल बात है। क्योंकि रूस भी डालर की वजह से परेशान है और रूस को युआन से कोई दिक्कत नहीं है। अतः भारत इस विषय पर अकेला पड़ता दिख रहा है। शायद यही वजह है कि भारत ने इससे अपना पल्ला पहले ही झाड़ लिया है।
वस्तुता भारत अपने रुपए को आगे बढ़ा रहा है। इसी हफ्ते हमारे पडोसी देश बांग्लदेश ने भी इससे संबन्धित खाता खोल लिया है। अब वह रुपए में व्यापार कर सकेगा। इससे दोनों देशो को फायदा होगा।
इस प्रकार फ़िलहाल ब्रिक्स देशों की नई मुद्रा के चलन में आने की संभावना समाप्त होती लगती है।